ताज़ियादारी बन सकती है कभी बूत परस्ती

मुसन्निफ़- मौलाना ततहीर अहमद रज़वी बरेलवी


ताज़ियादार अगरचे हमारे सुन्नी मुसलमान भाई ही हैं खुदाए पाक उन्हें समझ अता फरमाए। ताज़ियादारी और उसके साथ जो ख़िलाफ़े शरअ काम वो करते हैं उससे महफूज़ फरमाए, लेकिन चूंकि ताज़िया एक मुजस्समा है, लोग इसमे तरह तरह के फोटो और तस्वीरें भी लगाने लगे हैं उसको चूमते बल्कि सज्दे तक करने लगे हैं, चढ़ावे भी चढाये जाने लगे हैं यानी मुशरिक लोग अपने बुतों के साथ जो करते हैं एअतिक़ादन न सहीह अमलन वो सब कुछ होने लगा है, ख़तरा महसूस हो रहा है कि ताज़ियादारी कहीं आने वाले वक़्त में बूत परस्ती न बन जाए, क्योंकि सब लोग पढ़े लिखे और समझदार नहीं होते, अनपढों जाहिलों की भी दुनियां में कमी नहीं है।
लिहाज़ा मैं अपने सुन्नी अवाम व ख़ास भाइयों से गुज़ारिश करूँगा की वो ख़ुद भी इससे बाज़ रहें और दूसरों को भी प्यार व मुहब्बत से समझाकर बाज़ रखने की कोशिश करें।

(मुहर्रम मे क्या जाइज़ ?क्या नाजाइज़ ?  38)

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